मुंबई की उस भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन में हर रोज़ हज़ारों चेहरे आते-जाते थे, लेकिन आरव की नज़र सिर्फ एक चेहरे पर टिकती थी।
एक दिन बारिश ने पूरे मुंबई को भिगो दिया। ट्रेनें लेट थीं, प्लेटफॉर्म गीले थे, और लोग परेशान थे। आरव हमेशा की तरह खड़ा था, तभी उसने देखा—वह लड़की दौड़ती हुई आ रही थी, लेकिन उसका पैर फिसल गया। उसकी किताब गीले फर्श पर गिर गई, और वह खुद भी लगभग गिर ही गई थी कि आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।
मीरा ने ऊपर देखा। आरव एक घुटने पर बैठा था, उसके हाथ में एक छोटा-सा डिब्बा था। अंदर एक अंगूठी थी।
कभी-कभी प्यार किसी बड़े इत्तेफाक से नहीं, बल्कि एक छोटी से बूंद, एक गिरती किताब और एक साहसिक हाथ से शुरू होता है। अगर तुम्हें कोई और कहानी चाहिए—जैसे राजा-रानी की, ऑफिस रोमांस की, या फिर कॉलेज लव स्टोरी की—तो बस कहना!
मीरा की आँखें नम हो गईं। उसने धीरे से कहा, "तुम्हें पता है, मैं भी तुम्हें देखती थी। हर रोज़ खिड़की के पास खड़े उस लड़के को। मैं सोचती थी, काश यह ट्रेन कभी खत्म न हो।"